Friday, June 28, 2019
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
यार बताऊं कैसे मैं
चाह बहुत है कह जाऊं, पर यार बताऊं कैसे मैं सोचता हूं चुप रह जाऊं, पर यार छुपाऊं कैसे मैं । प्रेम पंखुड़ी बाग बन गया, धरा पर लाऊं कैसे...
-
चाह बहुत है कह जाऊं, पर यार बताऊं कैसे मैं सोचता हूं चुप रह जाऊं, पर यार छुपाऊं कैसे मैं । प्रेम पंखुड़ी बाग बन गया, धरा पर लाऊं कैसे...
-
कोरोना तुमने गज़ब का सीज़न बना दिया, आदमी को आदमी से अलग करने का रीजन बना दिया, हाथ धोते रहे लोग नौकरी से लगातार, पढ़े लिखे लोग होते रहे...
-
एक बार की बात है, दूर एक रेगिस्तान में, एक गुलाब था जिसे अपने सुंदर रूप पर बहुत गर्व था। उसकी एकमात्र शिकायत एक बदसूरत कैक्टस के बगल ...

No comments:
Post a Comment